सोमवार, 31 अक्टूबर 2022
मध्यप्रदेश देश का हृदय स्थल (Madhya Pradesh is the heart of the country.)
शनिवार, 29 अक्टूबर 2022
ठंडा खून
कड़कती ठंड से,ठिठुरता शहर,
जाग रहा है उनींदा सा,
फैला रखे हैं पंख ठंड ने,
बिखरी हुई है वो पेड़ों पर, छतों पर
और आंगन में ,
ठंड से ठंडा हो चला है आदमी
उसका खून ठंडा हो चला है,
ठंडी है उसकी संवेदनाएं,
उसका लहू गर्म नही होता है,
किसी दो वर्षीय कली के रेप पर,
वो डूबा हुआ है,भोग विलास में
मशीनी युग में मशीन सा बन गया है वो,
भरी जेबों के भीतर गर्मी है रुपयों की,
मुर्दा जानवरों के शरीर नोचता,
तलाशता है सुख,
नन्ही नन्ही जीवित गर्म देहो में,
गर्म होने के लिए जरूरत पड़ती है
उसे शराब की,
थोड़ा जीवित रहता है,
कलियों को मसलते समय,
फिर मर जाता है,
ज़मीर से भी ओर शरीर से भी |
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इन्दु सिन्हा"इन्दु"
गुरुवार, 27 अक्टूबर 2022
मजदूर आज मजबूर है (labor force today)
(रघुवीर सिंह पंवार )
कविता
मजदूर आज मजबूर है (labor force today)
राष्ट्रनिर्माता मजदूर आज मजबूर है दर दर की ठोकर खाकर घर से दूर है |
न रहने का आशियाना न घर का ठिकाना सब कुछ सहकर भी परिवार से दूर है |
मजदूर आज मजबूर है।
हजारों मिल पैदल चलकर , बच्चों को कंधे पर लेकर घर की राह पर पैदल चलने को मजबूर है |
न खाना है न जेब में पैसा है , फिर भी अपने कर्तव्य पथ पर निष्ठावान की तरह अडिग है |
क्योंकि राष्ट्र का कर्णधार है ?
फिर भी सरकार के आगे मजबूर है |
बच्चे भूखे वह भी भूखा न दाल न आटा है |
सुनी सड़को पर खून का पसीना बहा कर चकनाचूर है |
क्योंकि वह मजबूर है ? उसकी व्यथा सुनकर प्रशासन भी चुप है |
कातर दृष्टि से देखकर कब, आएगा ठिकाना यह सोचकर मजबूर है ?
जिसने बनाई इमारत व शिवालय लेकिन उनमें रहने के लिए आतुर है |
क्योंकि वह मजबूर है ?
यदि वह काम करना छोड़ दे तो दुनिया चकनाचूर है |
2 जून की रोटी के लिए तरस रहा क्योंकि वह मजबूर है ?
राजनीति की रोटी सेकने वालों के लिए वह एक दाव है |
वह आज भी मजबूर है, क्योंकि पैरों में छाले व घाव है |
चिलचिलाती धूप में पैदल चलने के लिए मजबूर है |
न खाना है न पानी न छांव है |
भगवान की अमूल्य धरोहर मजदूर आज भी मजबूर हैबुधवार, 26 अक्टूबर 2022
बचपन मेरा लोटा दो GIVE MY CHILDHOOD
बचपन मेरा लोटा दो
GIVE MY CHILDHOOD
बचपन की वो यादें , धूल भरी गलियों में खेला करते थे |
वे दोस्त अब कंहा खो गए जो हमारे हक़ में बोला करते थे ||
वो छुपा छाई , कबड्डी ,पव्वा मिलकर खेला करते थे |
बचपन की वो यादें चोरी से खेतो में आम ,पपीता खाया
करते थे ||
पकडे जाने पर घर वालो की मार से घंटो रोया करते थे |
गाँव के खेत खलियान ,जहां हम खेला करते थे ||
कंहा गई वो पाठशाला जहा हम पड़ने जाया करते थे |
गुरूजी के डर से स्कूल से भाग जाया करते थे |
वे कुवे ,तालाब, झरने जिसमे हम नहाया करते थे ||
घर वालो की डाट मार से हम रोया करते थे |
कहां खो गई बचपन में वो दादी की कहानियां रात में जो सुना करते
थे ||
होली
के त्यौहार में प्रेम से कीचड़ में खेला करते थे | घर –घर जाकर मिठाईयां खाया करते थे ||
कभी
दशहरा,कभी दिवाली कभी होली का त्यौहार मिलकर मनाया करते
थे |
कहां गया वो बचपन जिसे आज हम खोजा करते है |
काश आज वो बचपन हमारा कोई लोटा दे ||
GIVE MY CHILDHOOD
Those childhood memories, used to play in the dusty streets.
Where are those friends now lost who used to speak in our favor.
They used to play Chuppa Chhai, Kabaddi, Pavva together.
Those childhood memories used to steal mango, papaya in the fields.
When caught, we used to cry for hours at the beating of the family members
The farm of the village, where we used to play.
Where was the school where we used to go to study?
He used to run away from school due to fear of Guruji.
Those wells, ponds, springs in which we used to bathe.
We used to cry because of the scolding of the family members.
Where did he get lost in his childhood, who used to hear the stories of grandmother in the nightIn the festival of Holi, he used to play in the mud with love. Used to go from house to house and eat sweets.
Sometimes Dussehra, sometimes Diwali used to celebrate the festival of Holi together.
Where has the childhood that we look for today?
I wish today that childhood would give us a lot.
मंगलवार, 25 अक्टूबर 2022
दूषित वातावरण मनुष्य की देन
प्राकृतिक की गोद में बसा भारत देश ,हिमालय जैसे शिखर ,पवित्र करने वाली ,नदियों की कलरव ध्वनि ,मंत्र मुग्ध करने वाले वृक्ष जहां ऋषि-मुनि तपस्वी ,तपस्या करते थे | एसी देवभूमि जहां सांस लेना दूभर हो रहा है |पूरा पारितंत्र आज प्रदूषित हो चुका है |
मानव ने अपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए ;दानव बनकर अंधाधुंध तरीके से वृक्षों की कटाई करके धरती को वृक्ष विहीन
करता जा रहा है| पक्षियों की कलरव ध्वनि जो हमारे कानो व मन को मंत्रमुग्ध करती थी | वह गायब होने की कगार पर है ,जिससे मानव का मन अशांत होता जा रहा है |
इस कारण हम कई प्रकार की बीमारियों से जकड़ीत होते जा रहे है | प्रदूषण के कारण ओजोन परत प्रभावित हो रही है
,इससे निकलने वाली किरणों से घातक व असाध्य बिमारिया लगातार बड रही है, बड़े –बड़े कलकारखानो में लगी
चिमनियो से निकलने वाले धुंवे ,मोटर ,कार ,गाडियों से निकलने वाले धुंवे के कारण से पृथ्वी पर कार्बन डाइ
आक्साइड की मात्रा लगातार बडती जा रही है ;एव आक्सीजन की मात्रा में कमी आती जा रही है |
बड़े –बड़े शहरों में सांस लेना दूभर हो रहा है |विधालय में अध्यन करने वाले विधार्थी आक्सीजन की किट लगा रहे है
| यदि लगातार ऐसा ही होता रहा तो पृथ्वी पर रहना कठिन हो जावेगा |अतः हमें वातावरण को प्रदूषित होने से
बचाने के लिए प्रकृति की अमूल्य धरोहर वृक्ष को लगाकर रोक सकते है | यदि प्रत्येक व्यक्ति हर वर्ष एक वृक्ष लगाकर
इस बंजर भूमि को हरी भरी कर के इस धरा को हरियाली की चादर ओडाकर प्रदूषण मुक्त कर सकते है |
contaminated environment man
The country of India, settled in the lap of nature, peaks like the Himalayas, sanctifying, chirping sound of rivers, enchanting trees, where sages and sages used to do penance. AC Devbhoomi where breathing is becoming difficult. The whole ecosystem has become polluted today.
Man has made the earth treeless by cutting trees indiscriminately by becoming a demon to prove his selfishness.
is doing The chirping sound of birds that enchanted our ears and mind. It is on the verge of disappearing, due to which the human mind is becoming disturbed.
Because of this, we are becoming affected by many types of diseases. Ozone layer is getting affected due to pollution
Deadly and incurable diseases are increasing continuously due to the rays emanating from it, are engaged in big factories.
Carbon dioxide on the earth due to smoke coming out of chimneys, smoke from motors, cars, vehicles.
The amount of oxide is increasing continuously; and the amount of oxygen is decreasing.
It is getting difficult to breathe in big cities. Students studying in the school are installing oxygen kits.
, If this continues like this, it will become difficult to live on the earth.
To save, the priceless heritage of nature can be stopped by planting trees. If every person plants a tree every year
By filling this barren land green, we can make this earth pollution free by covering it with green cover.
मैने जिंदगी को देखा
मैने जिंदगी को देख कविता दिसंबर की कड़कती ठंड में दिल्ली के फुटपाथों पर, मैंने ठिठुरती जिंदगी को देखा| भूख से बेज़ार, अपंगों को अपनी...
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( रघुवीर सिंह पंवार ) पानी प्रकृति की अमूल्य धरोहर है | इसे सहज कर रखना मनुष्य का परम कर्तव्य है | यह पुनीत कार्य सिर्फ मानव ही कर सकते...
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र घुवीर सिंह पंवार ( लेख किसान ) भारत देश कृषि प्रधान देश है | भारत देश की एक तिहाई आबादी कृषि करके अ नाज पैदा कर देशवासियों के पेट...
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मैने जिंदगी को देख कविता दिसंबर की कड़कती ठंड में दिल्ली के फुटपाथों पर, मैंने ठिठुरती जिंदगी को देखा| भूख से बेज़ार, अपंगों को अपनी...










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